दिल्ली गैंगरेप: नाबालिग आरोपी पर आज आ सकता है फैसला

Delhi_gangrape_Bus_used_295नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली गैंगरेप के नाबालिग आरोपी राजू (परिवर्तित नाम) के मामले में शुक्रवार को दिल्ली गेट स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (बाल न्यायालय) संभवत: फैसला सुना देगा। इस फैसले पर पीड़िता के परिवार के अलावा देश व दुनिया की भी निगाहें टिकी हुई हैं। सभी को बेसब्री से फैसले का इंतजार है। वारदात के वक्त राजू (परिवर्तित नाम) नाबालिग था, लेकिन बीते 4 जून को वह बालिग हो गया। फिर भी उसे नाबालिग मानते हुए ही सजा सुनाई जाएगी।

अगर राजू को तीन साल की सजा होगी, तब उसे बाल सुधार गृह के स्पेशल होम में 21 वर्ष की आयु तक रखा जाएगा। राजू उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। राजू ने बचपन में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। बारह साल की उम्र में घर छोड़ दिल्ली आ गया था। यहां आनंद विहार बस अड्डे से चलने वाली निजी बसों में वह परिचालक की नौकरी करने लगा। उसने घर से नाता रिश्ता तोड़ लिया था।

दिल्ली गैंगरेप का मुख्य आरोपी रहा राम सिंह जब किसी अन्य बस का चालक था, तब वह उसके साथ परिचालक का काम कर चुका था। स्कूल सर्टिफिकेट में दर्ज उम्र के आधार पर जिस दिन (16 दिसंबर की रात) राजू ने वसंत विहार में चार्टर्ड बस में पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर 23 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट को हवस का शिकार बनाया, उस दिन उसकी उम्र 17 साल 6 महीने 11 दिन थी। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने स्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर 28 जनवरी को उसे नाबालिग करार दिया था।

राजू मामले में 26 मई को अभियोजन की गवाही पूरी हो गई। अभियोजन की तरफ से आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। 26 जून को सजा पर अभियोजन व बचाव पक्ष की बहस हुई। इस मामले में नाबालिग शब्द की दोबारा व्याख्या करने के बाबत सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका की बदौलत जुवेनाइल कोर्ट को चार बार अपना फैसला टालना पड़ा था। लेकिन पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को अपना फैसला सुनाने के लिए हरी झंडी दे दी थी।

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