भारत के प्रथम सैन्य उपग्रह जीसैट-7 का सफल प्रक्षेपण

M_Id_414340_satelliteबेंगलुरू। भारत का पहला रक्षा उपग्रह जीसैट-7 को शुक्रवार को फ्रेंच गुयाना के कोरू प्रक्षेपण स्थल से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया, जो पूरी तरह से सेना को समर्पित है। इसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी एरियनस्पेस के एरियन-5 रॉकेट के जरिए रात दो बजे छोडा गया। इससे देश को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में काफी मजबूती मिलेगी। इस सैटलाइट के लॉन्च करने के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास मिलिट्री कम्युनिकेशन सैटेलाइट हैं। यह मल्टी-बैंड संचार सैटेलाइट अपने ही देश में बना है, मगर इसरो ने इसे लॉन्च करने के लिए अपने भारी रॉकेट के बजाए एक यूरोपीय रॉकटे किराए पर लिया।

जीएसएलवी के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद इसरो जोखिम नहीं लेना चाहता था, इसलिए यह फैसला किया गया। हाल ही में इसमें ईंधन रिसने की वजह से उसे काफी नुकसान उठाना पडा था। किराए का रॉकेट और इंश्योरेंस का खर्च मिलाकर इस पूरे मिशन में 655 करोड रूपए खर्च हुए हैं। देश में निर्मित इस उपग्रह का इस्तेमाल भारतीय नौसेना करेगी जिसका सितंबर के अंत तक परिचालन शुरू हो जाने की उम्मीद है। जीसैट-7 उपग्रह पर 185 करोड रूपये की लागत आई है।

यह देश का पहला उपग्रह है जो रक्षा क्षेत्र के लिए समर्पित है। उपग्रह के प्रक्षेपण की प्रçRया शुक्रवार तडके 2 बजे शुरू हुई जो 50 मिनट तक चली। दूरदर्शन ने प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण किया। करीब 34 मिनट की उडान के बाद इसे 249 किलोमीटर “पेरिजी” (कक्षा में धरती का सबसे करीबी बिन्दु) और 35,929 किलोमीटर “अपोजी” (कक्षा में धरती का सबसे दूरतम बिन्दु) के “जीओसिंRोनस ट्रांसफर ऑर्बिट” में भेज दिया गया।

31 अगस्त से 4 सितंबर तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) उपग्रह को भूमध्य रेखा के 36,000 किलोमीटर ऊपर “जीओस्टेशनरी ऑर्बिट” में पहुंचाने के लिए इसे कक्षा में उपर उठाने के तीन अभियान चलाएगा। जीएसटी-7 की मदद से नौसेना एक टॉप सीक्रेट एनक्रिप्टेड सिस्टम के जरिए çंहद महासागर में दुश्मन जहाजों और पनडुब्बियों की सही लोकेशन का पता कर सकेगी और जानकारी का आदान-प्रदान कर सकेगी।

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